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अपराध

रिश्वत लेने ट्रांसपोर्टर के कार्यालय पहुचें आरटीओ दारोगा को बनाया बंधक

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देहरादून। आरटीओ के एक दारोगा पर एक व्यापारी ने रिश्वत लेेने का आरोप लगाते हुए उसे बंधक बना लिया। मामले की जानकारी मिलने पर विभागीय मंत्री को कहना पड़ गया कि जांच में दोषी पाए गए कर्मी को दंडित किया जाएगा, जिसे संस्पेड कर दिया गया है साथ ही मामले से जुड़ी तहरीर पुलिस चौकी में भी दे दी गयी है। आरोपी आरटीओ के दारोगा का कहना है कि वह तो वहंा रसमलाई खाने आया था। जिसे इस प्रकरण में फंसा दिया गया है।
रिश्वत खोरी का यह मामला देहरादून के मियांवाला क्षेत्र का है। इस इलाके में गजराम सिंह चौहान का कार्यालय है। सोशल मीडिया में खबर वायरल हुई कि ट्रांसपोर्टर गजराम ने अपने कार्यालय में एक दो स्टार वर्दीधारी आरटीओ कर्मी को बंद कर दिया। जिस पर मौके पर भीड़ जमा हो गयी।
बताया जा रहा है कि आरटीओ कर्मी एक घण्टे से अधिक समय तक अंदर बन्द रहा। मीडिया कर्मियों के आने के बाद ही सिंह एंटर प्राइजेज का शटर ऊपर उठाया गया। अंदर का नजारा बेहद दिलचस्प था। आरटीओ कर्मी हेलमेट समेत बैठा हुआ था। और गजराम सिंह चौहान खुलेआम आरोप लगा रहे थे कि ये कर्मी हर महीने दुकान पर आता है। और 8 हजार रुपए महीना ले जाता है।
आज भी यह पैसे लेने आया था। और हमने इसे अंदर ही बन्द कर दिया। उधर, आईटीओ कर्मी ने कहा कि गजराम ने उन्हें रस मलाई खिलाने के लिए बुलाया था। वो यहां आते रहते हैं। जबकि गजराम ने मेज पर रखे नोटों का लिफाफा भी दिखाया। गजराम ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में ली गयी रिश्वत के वीडियो फुटेज उनके पास है। जबकि विश्वास से लबरेज नजर आ रहे आरटीओ कर्मी ने चुनौती देते हुते रिश्वत लेने से जुड़े फुटेज दिखाने को कहा। इस बीच समूचे झगड़े की वीडियो बनती रही। आरटीओ कर्मी अपने उच्चाधिकारियों से भी मोबाइल पर पूरी स्टोरी बताता रहा। और ऊपर से निर्देश भी लेता रहा। दो तीन घण्टे तक चले ड्रामे के बाद आरटीओ कर्मी मोटरसाइकिल पर किक मार कर चलता बना।
आरटीओ प्रवर्तन दल में मौजूद कर्मी का कहना था कि वो अक्सर इनकी दुकान में आते रहते हैं। रिश्वत लेने जैसी कोई बात ही नहीं है। जबकि संत कबीर स्कूल के पास निर्माण सामग्री कारोबारी गजराम सिंह ने आरोप लगाया कि एक आरटीओ कर्मी उनके कार्यालय में रिश्वत लेने ही पहुंचा था। और इसीलिए उन्होंने शटर बन्द कर दुकान में कैद कर दिया।
व्यापारी गजराम सिंह ने कहा कि वह अपने कारोबार में पारदर्शिता रखते हैं और अपने प्लॉट में बिकने वाली हर सामग्री के दाम सार्वजनिक रूप से लिखते हैं। उनका आरोप है कि इसी ईमानदारी के बावजूद उनसे अवैध रूप से पैसे मांगे जा रहे थे।
इस मसले की गूंज परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा तक भी पहुंची। बत्रा ने जांच का भरोसा दिया है। इसके अलावा आरटीओ के अन्य अधिकारी वॉयरल वीडियो के प्रभाव’ को कम करने की कोशिश में कुछ पत्रकारों से गुहार करते नजर आए। मामले की लीपापोती भी शुरू हो गयी है। वहीं समाचार लिखे जाने तक आरटीओ का यह दारोगा संस्पेड कर दिया गया था।

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