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Saturday, September 23, 2023

शाबाश:नैनीताल की बेटी रिद्धि ने खुद के साथ ग्रामीण युवतियों को भी बनाया आत्मनिर्भर, हर माह अर्जित कर रहें हैं हज़ारों की धनराशि

रितेश सागर:

नैनीताल: मेट्रो सिटी में नौकरी और स्मार्ट पैकेज हर यूथ का सपना होता है, लेकिन नैनीताल की रिद्धि इसका अपवाद है। रिद्धि ने अपने सपने को पूरा करने के लिए मेट्रो सिटी की नौकरी छोड़ खुद आत्मनिर्भर बनने की राह चुनी है। अब रिद्धि न केवल अपना रोजगार कर रही है, बल्कि गांव की युवतियों को भी आत्मनिर्भर बना रही है। रिद्धि पंगूट गांव की युवतियों के साथ क्रोशिये के जरिये कपड़े के बैग, दस्ताने और खिलौने बनाती है और उन्हें इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से आनलाइन बेचती हैं। इससे न केवल उन्हें अच्छी आय हो रही है, बल्कि 11 युवतियाँ प्रतिमाह 3 हज़ार से अधिक आय भी अर्जित कर रहीं हैँ साथ ही अन्य महिलाओं युवतियों के लिए प्रेरणा स्रोत भी है।
ऋद्धि ने दिल्ली से स्नातक व स्नातकोत्तर किया। सस्टेनेबल डवलपमेंट (सतत विकास) पर उन्होंने काफी कार्य किया। जिसके बाद वह तमिननाडु में जाब करने लगीं। यहां ओरेवल संस्था के साथ जुड़कर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए कार्य किया। तमिलनाडु में उन्होंने क्रोशिया से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया और कई उत्पाद भी बनाए।

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जिसके बाद उन्होंने अपने गृह क्षेत्र आकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कार्य करने की सोची। वह चिराग संस्था के साथ जुड़कर कार्य करने लगीं। कार्य के दौरान उन्होंने छोटे से क्रोशिया को महिलाओं के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की ठानी। संस्था का कार्य छोड़कर बैंणी मार्केटिंग लोगो के माध्यम से नगर से लगभग 18 किमी दूर दूर पंगूट क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। जहां वह आकर्षक बैग, दस्ताने, खिलौने, मोजे समेत दस से अधिक उत्पाद बनाते हैं। नेट मार्केटिंग इंस्टाग्राम से अपने उत्पाद बेच रही हैं, जो हाथों हाथ बिक भी रहे हैं। ऋद्धि ने बताया कि एमएसएमई में उनका पत्राचार चल रहै है शीघ्र ही ‍वह अपने कार्य को आगे बढ़ा रही है।

अब तक 11 युवतियां जुड़ी
-ऋद्धि ने बताया कि उनके साथ पंगूट के पाली गांव की साक्षी, नेहा, भावना, ज्योति, शालिनी, अंजलि, डौली, हिमानी, पूजा, दिव्या, संगीता आदि हैं। ये लोग प्रतिदिन चार से पांच घंटे कार्य करते हैं। माह में 20 दिन कार्य के बाद प्रतिमाह उन्हें ढाई से तीन हजार रुपये मिल रहे हैं। गांव की बहनों ने भी ऋद्धि की पहल की सराहना कर अपने स्वावलंबी होेने को स्वीकारा।

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