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उत्तराखण्ड

विकसित भारत वर्कफोर्स के विजन को मिलेगी गति

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देहरादून। भारत के अप्रेंटिसशिप इकोसिस्टम की छिपी हुई क्षमता को सामने लाने के लिए एक निर्णायक कदम उठाते हुए, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने आज ष्सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने विषय पर एक हाई-लेवल कंसल्टेटिव वर्कशॉप का आयोजन किया। इस वर्कशॉप ने अप्रेंटिसशिप को एक ऐसे परिवर्तनकारी माध्यम के रूप में रेखांकित किया, जिसके द्वारा विकसित भारत के विज़न के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स का निर्माण किया जा सकता है; साथ ही, इसका मुख्य फोकस भारत के मज़बूत पॉलिसी फ्रेमवर्क को ज़मीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर लागू करने पर रहा।
इस वर्कशॉप का उद्देश्य एमएसएमई अप्रेंटिसशिप में भागीदारी की ज़मीनी हकीकतों पर चर्चा करना था, जिसमें मुख्य रुकावटें, सफल तरीके और एम्प्लॉयर की भागीदारी को प्रभावित करने वाले कारक शामिल थे। इसमें क्लस्टर-आधारित कंसोर्टिया, श्कमाओ और सीखोश् (अर्न वाइल यू लर्न), और काम के साथ-साथ सीखने (वर्क-इंटीग्रेटेड लर्निंग) जैसे मॉडल्स की व्यावहारिकता का आकलन किया गया। हालांकि नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (एनएपीएस) में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है, फिर भी अप्रेंटिसशिप का ज़्यादातर हिस्सा बड़े और मध्यम उद्यमों तक ही सीमित है। खास बात यह है कि 94ः एमएसएंई अप्रेंटिस अभी निजी क्षेत्र के संस्थानों में ही काम करते रहे हैं जो ऐसे समाधानों की ज़रूरत को दिखाता है जो निजी एमएसएमई इकोसिस्टम की काम करने की असल स्थितियों और बाधाओं के अनुरूप से तैयार किए गए हों। चर्चा में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भागीदारी को मज़बूत करना अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों के विस्तार और वर्कफोर्स में बेहतर समायोजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिभागियों ने लगातार आने वाली रुकावटों, जिसमें कम जागरूकता और कम्प्लायंस प्रोसेस में कथित जटिलता शामिल है, पर खुलकर चर्चा की।कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय की सचिव, देवश्री मुखर्जी ने कहा, “भारत के युवाओं में अपार क्षमता है, लेकिन इस क्षमता को वास्तविक अवसरों में बदलने के लिए, हमें सीखने और काम के बीच मज़बूत जुड़ाव की ज़रूरत है। अप्रेंटिसशिप इस जुड़ाव को बनाने में मदद करती है। एमएसएमई हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और रोज़गार के सबसे बड़े स्रोतों में से एक भी हैं। अगर हम अप्रेंटिसशिप को आसान, ज़्यादा व्यावहारिक और छोटे व्यवसायों के लिए अपनाने में सरल बना सकें, तो हम लाखों युवाओं के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं, साथ ही कुशल प्रतिभा के साथ उद्यमों को बढ़ने में भी मदद कर सकते हैं। यह वर्कशॉप ऐसे समाधान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो उद्योग और युवाओं, दोनों के लिए ज़मीनी स्तर पर काम करते हैं।”

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