Connect with us

उत्तराखण्ड

ज्योति कलश यात्रा में देवभूमि उत्तराखण्ड की झांकी ने मोहा मन

Ad

देहरादून/हरिद्वार। शताब्दी समारोह में मंगलवार को भव्य ज्योति कलश यात्रा की शोभायात्रा निकाली गयी। भारत सहित अमेरिका, जापान, कनाडा, नेपाल आदि देशों की यात्रा पूरी 58 कलश यात्राएं गायत्री तीर्थ शांतिकुंज पहुंची हैं। प्रातः मंचीय कार्यक्रम में अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रमुख शैलदीदी, स्वामी हरिचेतनानंद जी महाराज, शताब्दी समारोह के दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या, महिला मण्डल की प्रमुख शैफाली पण्ड्या वैदिक कर्मकाण्ड के साथ पूजन किया। दलनायक डॉ पण्ड्या ने शोभायात्रा को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर ज्योति कलश यात्रा के साथ शांतिकुंज द्वारा चित्रित  देवभूमि उत्तराखण्ड की अद्भुत एवं अलौकिक झांकी ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
हिमालयी संस्कृति और आध्यात्मिक गरिमा से सजी इस झांकी ने उत्तराखण्ड की देवतुल्य परम्पराओं, लोकसंस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का सजीव दर्शन कराया। जैसे ही यह झांकी यात्रा में आगे बढ़ी, श्रद्धालु भावविभोर होकर नमन करने लगे और पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठा। ज्योति कलश यात्रा भारत की सांस्कृतिक एकात्मता का जीवंत महाकाव्य बनकर उभरी। यात्रा में सम्मिलित छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोकनृत्य ने अपनी सहजता, ऊर्जा और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली का भावपूर्ण प्रदर्शन किया। ढोल-मांदर की गूंज के साथ थिरकते कदमों ने जनजातीय संस्कृति की जीवंतता को साकार कर दिया। गुजरात का पारंपरिक ‘तलवार राठवा नी घेर’ नृत्य वीरता, शौर्य और अनुशासन का प्रतीक बनकर उभरा। तलवारों की लयबद्ध गतियों के साथ नर्तकों की सशक्त प्रस्तुतियों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। ओडिशा का डाकूल नृत्य अपनी विशिष्ट वेशभूषा और प्रतीकात्मक भाव-भंगिमाओं के माध्यम से लोकआस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की गहराई को उजागर करता रहा। मध्यप्रदेश का भगोरिया एवं भड़म-गौर नृत्य उत्साह, उमंग और लोकजीवन की मस्ती को अभिव्यक्त करता हुआ यात्रा का विशेष आकर्षण बना। रंग-बिरंगे परिधानों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और सामूहिक नृत्य-लय ने सम्पूर्ण यात्रा को उल्लास से भर दिया। शताब्दी समारोह के दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या ने बताया कि विविध राज्यों की इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकात्मता और राष्ट्रीय समरसता का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि जब ज्योति के साथ लोकसंस्कृति की धड़कनें जुड़ीं, तो यह यात्रा भारत की आत्मा का सजीव उत्सव बन गई। यात्रा में लंदन के लार्ड कृश रावल, लार्ड मेंल्डेसन सहित भारत के कोने कोने से आये स्वयंसेवक, अनेक प्रतिष्ठित उद्योगपति, मीडियाबंधु आदि ने प्रतिभाग किया।

Ad
Continue Reading
You may also like...

More in उत्तराखण्ड

Trending News