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उत्तराखण्ड

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर दून में हुई महापंचायत

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देहरादून। राजधानी के परेड ग्राउंड के बाहर अंकिता को न्याय दिलाने के लिए अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने महापंचायत की। महापंचायत में कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के घटक दलों के अलावा राज्य आंदोलनकारियों समेत तमाम सामाजिक और जन सरोकारों से जुड़े संगठन शामिल हुए। महापंचायत में पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉक्टर सत्यनारायण सचान ने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर धामी अंकिता मामले की सीबीआई जांच पर्यावरणविद की एफआईआर को आधार बनाकर करवा रहे हैं, जबकि सीबीआई जांच उस व्यक्ति की तहरीर पर नहीं बल्कि अंकित के माता-पिता की तहरीर के आधार पर होनी चाहिए। यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। उन्होंने कहा जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाये, उनको भी सीबीआई जांच की परिधि में लाया जाए।
इस मामले में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी ने कहा इस मामले में धामी सरकार वीआईपी को बचाने का काम कर रही है। सीबीआई जांच में की गई चालाकी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। जिसमें अनिल जोशी की शिकायत पर जांच हो रही है। हम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी सीबीआई जांच चाहते हैं। हम अंकिता को न्याय दिलाने के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे।
सत्यनारायण सचान ने कहा जिन्होंने वसंत विहार थाने में अंकिता केस मे तहरीर दी है, उनका कोई संबंध अंकिता के परिवार से नहीं है, और ना ही वह किसी आंदोलन में नजर आए। इसलिए उनकी भी जांच होनी चाहिए। उनके मोबाइल की भी जांच की जानी चाहिए कि उनकी इस संबंध में किससे बातें हुई है। इस महापंचायत में यही निर्णय लिए जा रहे हैं, संघर्ष मंच की तरफ से महापंचायत जो भी निर्णय आज लिए जाएंगे, हर पॉलीटिकल पार्टी उस निर्णय को मानेगी। महापंचायत में पहुंची शिबा ने कहा पर्यावरणविद की तहरीर के आधार पर जांच नहीं होनी चाहिए। इस मामले की सीबीआई जांच अंकिता भंडारी के माता-पिता की तरफ से दी गई तहरीर के आधार पर की जानी चाहिए। अंकिता हत्याकांड में सजायाफ्ता लोगों के केस के तहत अग्रिम जांच होनी चाहिए। अंकिता के मर्डर का क्या मोटिव रहा, यह बिल्कुल सामने नहीं आया है। उस संदर्भ में वीआईपी का साफ तौर पर जिक्र है।
महापंचायत में शामिल हुए भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा आखिरकार अंकिता भंडारी प्रकरण में सरकार ने सड़कों के आंदोलनों के दबाव में सीबीआई जांच कराये जाने की घोषणा की। यह भी प्रश्न है कि अंकिता के माता-पिता और तमाम आंदोलनकारी पहले दिन से ही इस मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाते आ रहे थे, लेकिन सरकार हीला हवाली करती रही। उन्होंने कहा अब 3 साल बाद विलंबित जांच हो रही है। इंद्रेश का कहना है कि महापंचायत में सभी ने एक स्वर में अंकिता हत्याकांड की जांच सीबीआई से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराये जाने की मांग उठाई है। सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नहीं करवाई जा रही है। उनका कहना है कि जिनकी शिकायत पर यह सीबीआई जांच की जा रही है, उनका इस पूरे प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है। इस प्रकरण में तहरीर देने वाले पर्यावरणविद का अंकिता से कोई सरोकार नहीं रहा है। 9 जनवरी को उनकी तरफ से इस मामले में तहरीर देने के बावजूद उन्होंने अंकिता के माता-पिता से भी मिलना तक मुनासिब नहीं समझा। इससे समझा जा सकता है कि जिस व्यक्ति का इस मामले से कोई सरोकार नहीं है, उसको शिकायतकर्ता बना दिया गया। इसमें अंकिता के माता-पिता को कैसे बाहर रखा गया है। उसका जवाब सरकार के पास नहीं है।

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